नाम- मनजीत सिंह मान
पिता – श्री तरलोक सिंह मान
माता – श्रीमती सिमरजीत कौर मान
पत्नी – श्रीमती अमनदीप कौर मान
पुत्र – •रनवीर, जशनवीर
पता – गांव नंगलशामा, डा•खाना लद्देवाली, जिला जालन्धर पंजाब।
जन्म तिथि – 15-02-1973
शिक्षा – ग्रैजुएशन
नौकरी – सब-इंसपैक्टर (पंजाब पुलिस)
खेल – बॉडी बिल्डिंग
पसंदीदा हीरोईन – मौसमी चैटर्जी, मधुबाला
पंसदीदा हीरो- धरमिंदर, अमिताभ बच्चन
पसंदीदा फिल्म – मुगले-आजम
पसंदीदा टी.वी.शो – कामेडी सरकस
बाडी बिल्डिंग की शुरुआत:- सन् 1990 में मैट्रिक की परीक्षा देने के बाद वर्जिश शुरु की ताकि कालेज में जाने से पहले बॉडी थोड़ी बहुत अच्छी लगने लगे। गांव में ही एक छोटे से जिम में स. अरविन्दर सिंह की देख-रेख में वर्जिश शुरु की । 31 दिसंबर 1990 को पहला कम्पटीशन जालन्धर खेला दूसरा स्थान प्राप्त किया। 1991में जूनियर पंजाब खेला जिसमें 6 वां स्थान मिला। कुछ महीनों बाद हुए कम्पटीशन 1991में ही सीनीयर पंजाब में चौथा स्थाना प्राप्त किया । फिर श्री दीपक पराशर जी की कोचिंग में अपनी ट्रेनिंग की और 1992 मार्च महीने में सीनीयर पंजाब में दूसरा स्थान प्राप्त किया फिर डा. रणधीर हस्तीर जी से मुलाकात हुई जिन की कोचिंग में मैंने लगातार बॉडी बिल्डिंग में तरक्की की और 15 नवंबर 1992 को सीनीयर पंजाब में पहली बार पहला स्थान हासिल किया और उसी दिन हुई सीनीयर नार्थ इंडिया प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया । मेरे भार वर्ग में दिल्ली के प्रेम कुमार ने प्रथम स्थान हासिल किया, जिसने मुझे उत्साहित करते हुए कहा कि यदि मैं इस तरह मेहनत करता रहा तो आगे बहुत अच्छी प्रफौरमैंस दे सकता हुँ । इस के बाद 30 जनवरी 1994 को जी सीनीयर नार्थ इंडिया प्रतियोगिता हुई उसमें मैं ओवर आल विनर रहा। 1993 में जूनियर नैशनल प्रतियोगिता नासिक में हुई जिसमें मैं विनर रहा। इसी बीच मुझे कुछ समय मिस्टर यूनिवर्स श्री प्रेम चंद डेगरा जी के पास ट्रेनिंग करने का मौका मिला और यहां से भी मैंने ट्रेनिंग के कई नुक्ते सीखे जो आगे जाकर मेरे काम आए। 1994 में मैंने मलेशिया में जूनियर ऐशियन प्रतियोगिता में भाग लिया। जिसमें मुझे जूनियर एशिया के बैस्ट पोजर का खिताब मिला, जिसका श्रेय मैं डा. रणधीर हस्तीर जी को देता हुँ क्योंकि इस कम्पीटीशन की तैयारी उन्होंने ही करवाई थी। 1994 में ही जे सी टी क्लासिक ओपन इंडिया चैंपियनशिप में 9 वां तथा 1995 में जे सी टी क्लासिक ओपन इंडिया में 6 वां स्थान हासिल कर देश के सर्वश्रेठ 6 बाडी बिल्डरों की गिनती में आ गया। अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 8 गोल्ड, 6 सिल्वर तथा 3 कांस्य पदक जीते हैं। 1998 में सीनीयर एशिया में 6 वां स्थान हासिल किया। वर्ष 2002-2003 में पुलिस महकमे में सब-इंसपैक्टर रैंक के लिए कोर्स करना पड़ा। जिससे सब-इंसपैक्टर तो बन गया लेकिन बाडी बिल्डिंग छोडऩी पड़ी। एक बार फिर से 2009 में अपनी अच्छी फोर्म दिखाते हुए फिर से (एशियन प्रतियोगिता के लिए) भारतीय बॉडी बिल्डिंग टीम में चुना गया। फिर 2011 में वल्र्ड पुलिस गेम जो न्यूयार्क यू.एस.ए में हुई उसमें इंडियन पुलिस (पंजाब पुलिस) का नेतृत्व करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।
एक बात मैं यहां कहना चाहूंगा कि बाडी बिल्डिंग करने में आप के परिवार और आप के जीवन साथी का योगदान बहुत जरूरी है। मेरे परिवार में बाडी बिल्डिंग शुरु करने से ही मेरे दादा जी और दादी जी का बहुत योगदान रहा है उस के बाद मेरे माता-पिता का और पत्नी का योगदान रहा है। यदि आपका परिवार साथ न दे तो आप का इस खेल में कामयाब होना असंभव है। अंत में मैं एक इंसान का धन्यवाद करना चाहता हुं कि जिन्होंने मेरे बाडी बिल्डिंग के भविष्य में कई बार मेरी बहुत सहायता की है। मुझे और ग्रेट खली को यू.ऐस.ए.का वीज़ा दिलवाने में भी उन का बहुत योगदान है खली अगर आज दुनियां में जाना-माना डबल्यू डबल्यू ई चैंपियन है तो उसमें भी और मेरे वल्र्ड पुलिस गेम का में मैडल विजेता होने में इनका बहुत योगदान है, वह है डा. बलवीर हस्तीर और डा.रणधीर हस्तीर जी।
मैं बॉडी बिल्डिंग का शौकं रखने वाले लोगों, खिलाडिय़ों को यह राय/सीख देना चाहता हुं के हर व्यक्ति किसी खास खेल लैवल (स्तर) पर चैंपियन नहीं हो सकता, इस के लिए उसका नैचुरल पौटैंशियल होना जरूरी है। जो लोग किसी खास व्यक्ति/खिलाड़ी के शरीर को देखकर उस जैसा शरीर बनाने के लिए और किसी के कहने पर स्टीरायडस या बहुत कीमती सप्लीमैंटस का इस्तेमाल करना शुरु कर देते हैं वह अपने शरीर का और अपने पैसे का बहुत नुक्सान कर लेते हैं और इस का पछतावा बाद में होता है। आप किसी एक्सपर्ट की राय लेकर, अपने वजट के हिसाब से अपने लिए सही सप्लीमैंट का चुनाव करें। यदि आपका चुनाव गलत हुआ तो फायदे की जगह नुक्सान उठाएंगे।
नैचुरल बाडी बिल्डिंग लाईफ लौंग चलती है। आप लम्बी और स्वस्थ आयु का आनंद लेते हैं। यदि आप जवानी में स्टीरायड लेते हैं तो कुछ साल बाद की आयु दुखद और कई बीमारियों, परेशनियों से भरपूर हो सकती है। इसलिए कुछ समय के लिए सारी उम्र को बीमारियों में न धकेलें क्यों कि आपकी बीमारी से सिर्फ आप ही नहीं पूरा परिवार परेशानियों में घिर जाएगा।
तो मेरा अनुभव यही है कि नैचुरल बाडी बिल्डिंग करें और लम्बी स्वस्थ उम्र जिएं।
शुभकामनाओं सहित।

— मनजीत सिंह मिस्टर इंडिया, वल्र्ड पुलिस प्रथम रनर-अप।



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