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आजकल जिम जाना एक फैशन बन गया है | हर आयु वर्ग के लोगों में अपने आपको फिट रखने और दिखने में एक उत्सुकता रहती है |खासतौर पर आजकल तो कम आयु के युवा वर्ग में भी जिम जाने को लेकर होड़ सी लगी हुई है | जिम जाकर वे तरह तरह की एक्सरसाइज तो करते ही है साथ ही अपने शरीर को आकर्षित आकार और साइज के लिए वे वेट लिफ्टिंग भी करते हैं |
वेट लिफ्टिंग किसी भी एक्सरसाइज प्रोग्राम का जरुरी हिस्सा है | चाहे आप मांसपेशियों का निर्माण ,वेट कम करने या फिर अपने इच्छा अनुसार बॉडी साइज और शेप बनाने की कोशिश कर रहें हो , वेट लिफ्टिंग को अपने रोजाना वर्कआउट में शामिल करके आपको अपने उदेश्य को पाने में मदद मिल सकती है |आमतौर पर बहुत सारे लोगों का ये मानना है की अगर कम उम्र में वेट लिफ्टिंग की जाए तो इससे व्यक्ति की लम्बाई और शारीरिक विकास पर प्रभाव पड़ता है | इस बात में कितनी सच्चाई है ये जानने के लिए ये लेख आपके लिए लाभदायी रहेगा |

वेट लिफ्टिंग आपके शारीरिक विकास यानी ग्रोथ को नहीं रोकती और न ही इससे आपके हाइट यानि लम्बाई पर कोई प्रभाव पड़ता है | जैसे जैसे आप बड़े होते है आपकी हड्डियां भी लम्बी होती जाती है |हर किसी की हड्डियों के सिरे पर Epiphyseal प्लेट्स होती है | जैसे जैसे शारीरिक विकास होता जाता है ये प्लेट्स भी जुड़नी शुरू हो जाती है |१८ से २५ वर्ष की आयु तक पूरा शारीरिक विकास हो जाता है तब तक हड्डियां भी मजबूत और शक्तिशाली हो जाती है और Epiphyseal प्लेट्स का बढ़ना भी स्वय रुक जाता है और हमारी हाइट बढ़नी भी बंद हो जाती है |
कुछ लोगों में ये भय है की जब Epiphyseal प्लेट्स को प्रेस किया जाता है तो इससे उनकी ग्रोथ रुक जाती है ,लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है | जब आप वेट लिफ्टिंग करते है तब आपके इन प्लेट्स पर इतना दबाव नहीं पड़ता की इससे आपकी ग्रोथ पर कोई प्रभाव पड़ सके |

जिम जाने को लेकर भी लोगों में बहुत भ्रांतियां पायी जाती है क्योंकि जिम जाकर हैवी वेट लिफ्टिंग को लेकर भी उनमे ये भय बना रहता है कि इससे उनकी ग्रोथ पर प्रभाव पड़ता है| आजकल यह आम धारणा है कि जिम जाने की सबसे कम आयु कौन-सी है | वास्तविक तौर पर व्यायाम शरीर के अंगों की प्राकृतिक गतिविधि है | अगर आप जिम एक्सरसाइज़ की मूवमेंट्स की और देखें तो आप आसानी से निरीक्षण कर सकते हैं कि वह सभी गतिविधियाँ साधारण और प्राकृतिक है | मूवमेंट्स जैसे कि- पुश-अप,चिन-अप्स, फ्रंट प्रैस, बारबेल कर्ल आदि बायो मेकैनिकल मूवमेंट्स है, जहाँ मांसपेशियां पेशी समूह के बायोलॉजिकल मूवमेंट्स के साथ जोर लगाती है | यह मांसपेशियों कि मजबूती, जोड़ो पर कम दबाव का काम करती है|
आजकल 14 साल कि कम आयु के बच्चों में आम समस्या पाई जाती है वो है उनमे एकाग्रता, गंभीरता,स्थिरता ,संतुलन ,सुरक्षा,जागरूकता आदि कि कमी और इस वजह से उन्हें अनचाही दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है परिणामस्वरूप उन्हें जिम एक्सरसाइज़ से ड्राप ऑफ करना पड़ता है | यह सलाह दी जाती है कि 14 वर्ष कि आयु ही जिम जाने कि उचित आयु है जब जिम के द्वारा मिलने वाले लाभ बिना समस्या के प्राप्त हो सकते है | इस आयु में स्त्री और पुरुष में नेचुरल हार्मोन का फ्लो बढ़ जाता है और जिम एक्सरसाइज़ से प्राप्त प्राकृतिक विकास स्त्री और पुरुष दोनों के लिए लाभदायी होता है क्योंकि दोनों को मज़बूत ,शक्तिशाली ,मस्कुलर ,लीन और स्वस्थ काया प्राप्त होती है | इस बात का ध्यान रहे कि बच्चे मानसिक रूप से स्वस्थ हो और उन्हें किसी योग्य ,मान्यता प्राप्त और प्रेरित ट्रेनर के अंतर्गत ही ट्रेनिंग दी जाए | यह उनके लिए उचित और लाभदायी होगा |

एक और कारण है जिसकी वजह से लोग सोचते है कि जिम जाना बच्चों के लिए ठीक नहीं है वह है की वे सोचते है बच्चें की आयु छोटी होने के कारण वे बड़ों की तरह मसल्स डेवेलप नहीं कर सकते ,बच्चों में मसल्स का उचित निर्माण करने वाले हॉर्मोन्स नहीं होते | लेकिन वेटलिफ्टिंग सिर्फ उनकी हड्डियों पर स्ट्रेस डालने का ही काम करती है,जो की उन्हें विकसित होने के साथ साथ सेंट्रल नर्वस सिस्टम के विकास में भी मदद करती है | हाल ही में हुई रिसर्च के मुताबिक छोटी आयु में वेट लिफ्टिंग से हड्डियों के निर्माण करने और मोटापे से मुक्ति में सहायता मिलती है | यंग ऐज में की जाने वाली वेटलिफ्टिंग बुढ़ापे में होने वाली हड्डियों की बीमारी से भी बचाव करती है |
बॉडीबिल्डिंग और वेटलिफ्टिंग से तब आपके बच्चों की सेहत को नुकसान हो सकता है ,अगर वो गलत तरीके से करते है या फिर वह बॉडीबिल्डर्स की तरह सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर दें तो यह उनके लिए हानिकारक होगा |
विकासशील किशोरों को उचित और संतुलित डाइट लेनी चाहिए न की बॉडीबिल्डर्स की तरह रिस्ट्रिक्टेड डाइट| उन्हें फल ,सब्जियां ,साबुत अनाज ,और प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में लेना चाहिए | इससे उनकी एथेलेटिक एबिलिटी के साथ -२ पूरी सेहत बनती है | किशोरों को फिटनेस सप्लीमेंट्स खासतौर पर स्टेरॉइड्स लेने से परहेज करना चाहिए | स्टेरॉइड्स से लिवर खराब होने और दिल की बीमारियां होने का खतरा होता है |



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